मनोविज्ञान | Psychology | बालविकास

मनोविज्ञान | Psychology >> मनोविज्ञान का अतीत बहुत लम्बा है जबकी इतिहास बहुत छोटा है।   —- एबिंगठास >> मनोविज्ञान का इतिहास 16वीं शताब्दी से प्रारम्भ होता है जबकि अतीत 400 ई.पू. से प्रारम्भ हो जाता है। >> ‘मनोविज्ञान’ का सर्वप्रथम प्रयोग 1590, ई. में रुडोल्फ गोलकर ने अपकी पुस्तक ‘Psychologia’ के अन्तर्गत किया। >> … Read more

कार्तिकेय कौन थे ?| कार्तिकेय का शिवजी से सम्बन्ध

कार्तिकेय 👨‍🦰 कार्तिकेय के जन्म की कथा        शिवजी और पार्वती के पुत्र कार्तिकेय के जन्म सम्बन्धी एक धारणा है कि उनका जन्म एक विलक्षण प्रयोग द्वारा हुआ था। इसके अनुसार छह जीवों को एक शरीर में प्रवेश कराके उन्हें जीवन दिया गया था। वह छह कृतिकाओं (देवियों) के माध्यम से जन्मा था, इसलिए उसे कार्तिकेय … Read more

प्राचीन भारतीय शिक्षा | Ancient Indian Education

प्राचीन भारतीय शिक्षा           प्राचीन भारतीय सभ्यता विश्व की सर्वाधिक रोचक तथा महत्त्वपूर्ण सभ्यताओं में से एक है। इस सभ्यता के समुचित ज्ञान के लिए हमें इसकी शिक्षा पद्धति का अध्ययन करना आवश्यक है, जिसने इस सभ्यता को चार हजार वर्षों से भी अधिक समय तक सुरक्षित रखा। प्राचीन भारतीयों ने शिक्षा को अत्यधिक महत्व प्रदान … Read more

राजस्थान की चित्रकला महत्वपूर्ण तथ्य

चित्रकला की प्रमुख संस्थाऐं जोधपुर  –  चितेरा, धोरा  उदयपुर  –  खमल, तुलिका कला परिषद जयपुर   – कलावृत, आयाम, पैंग, क्रिएटिव संस्थाऐं, जवाहर कलाकेन्द्र 1993 में  भीलवाड़ा – अंकन राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स एवं क्राफ्ट्स – महाराजा रामसिंह के काल में जयपुर में स्थापित। पुराना नाम – मदरसा-ए-हुनरी।  राजस्थान ललित कला अकादमी – 24 नवम्बर … Read more

हाड़ौती शैली | बूँदी शैली | अजमेर शैली | नागौर शैली

हाड़ौती शैली स्कूल | चित्रकला शैली 🕊️ बूंदी शैली इस शैली पर मेवाड़ चित्र शैली का प्रभाव स्प्ष्ट नजर आता है। बूंदी शैली का स्वर्णकाल सुर्जन सिंह हाड़ा का काल माना जाता है।  बूंदी शैली को राजस्थानी विचारधारा की शैली या प्राचीन विचारधारा की शैली कहा जाता है। बूंदी शैली, किशनगढ़ शैली के बाद राज्य … Read more

ढूंढाड़ स्कूल | जयपुर चित्रकला शैली | शेखावाटी शैली

ढूंढाड़ स्कूल | जयपुर चित्रकला शैली  🐅 अलवर शैली यह शैली सन् 1775 ई. मे जयपुर से अलग होकर ‘राव राजा प्रतापसिंह’ के राजत्व मे स्वंत्रत अस्तित्व प्राप्त कर सकी। उनके राजकाल मे ‘शिवकुमार और डालूराम’ नामक दो चित्रकार जयपुर से अलवर आये।  अलवर कलम जयपुर चित्रकला की एक उपशैली मानी जाती हैं।   डालूराम भिति … Read more

कबीर दोहावली | Kabir Ke Dohe

कबीर दोहावली दुख में सुमरिन सब करे, सुख में करे न कोय ।  जो सुख में सुमरिन करे, दुख काहे को होय ॥ 1 ॥   तिनका कबहुँ न निंदिये, जो पाँयन तर होय ।  कबहुँ उड़ आँखिन परे, पीर घनेरी होय ॥ 2 ॥   माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर … Read more

प्रेम रंग में दीवानी मीरा ~ करुणा व प्रेम का प्रतीक लोकदेवता बाबा रामदेव ~ रामसा पीर, रुणेचा रा धणी, पीरां रा पीर श्रीकृष्ण को सर्वोत्तम मित्र क्यों माना जाता है ? परमाणु क्या होता है ? आप जानते हो ! झाँसी की रानी के रहस्मयी तथ्य सुनीता विलियम्स ~ भारतीय मूल की अन्तरिक्ष यात्री पारिवारिक सम्बंध में हमारे रिश्तों की पहचान क्या होती है ? क्या आप पदार्थ (Matter) के बारे में जानते है ?🤔 सरदार भगतसिंह क्यों बने क्रन्तिकारी ? भूमण्डलीय स्थितीय तंत्र (GPS – Global Positioning System ) International Pushkar Fair