1857 ई० की क्रांति

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राजस्थान में 1857 ई० के स्वतंत्रता आन्दोलन के बारे में जानने से पूर्व उसकी पृष्ठभूमि का सर्वेक्षण किया जाना आवश्यक है। राजस्थान के देशी राज्यों ने कम्पनी के साथ संधियाँ (1818 ई०) करके मराठों द्वारा उत्पन्न अराजकता से मुक्ति प्राप्त कर ली तथा राज्य की बाह्य एवं आन्तरिक सुरक्षा के लिए निश्चित हो गए, क्योंकि … Read more

महाराणा प्रताप का मुगलों से संघर्ष

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      राजपूताने के वीर महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई, 1540 ई. (रविवार) को कुम्भलगढ़ के कटारगढ़ दुर्ग (बादलमहल) में हुआ था। प्रताप महाराणा उदयसिंह का सबसे बड़ा पुत्र था। प्रताप की माता का नाम जयवंताबाई (अखैराज सोनगरा चौहान की पुत्री) था। प्रताप का बचपन कुंभलगढ़ में ही व्यतीत हुआ। महाराणा प्रताप बनवासी … Read more

शिवाजी और मराठा स्वराज

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           औरंगजेब के समय में जब मुगल साम्राज्य का गौरव अपने चरमोत्कर्ष पर था, शिवाजी के नेतृत्व में मराठों के उत्थान ने उसे गहरा आघात पहुँचाया। औरंगजेब को अपने शासन के अन्तिम वर्ष दक्कन में मराठों के साथ भीषण संघर्ष में बिताने पड़े। मराठों के विरूद्ध चलने वाले यह दीर्घ संघर्ष अन्ततः मुगल साम्राज्य के … Read more

मुगलकालीन स्थापत्य कला एवं संस्कृति

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मुगलकालीन स्थापत्य कला मुगलकाल को उसकी बहुमुखी सांस्कृतिक गतिविधियों के कारण भारतीय इतिहास का ‘द्वितीय क्लासिकी युग‘ कहा गया है। मुगलकालीन स्थापत्य मध्य एशिया की इस्लामी और भारतीय कला का मिश्रित रूप है, जिसमें फारस, मध्य एशिया, तुर्की, गुजरात, बंगाल एवं जौनपुर आदि स्थानों की परम्पराओं का अद्भुत मिश्रण मिलता है। इस काल में स्थापत्य … Read more

प्राचीन  भारत  में  शिक्षा  का  विकास

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प्राचीन भारतीय सभ्यता विश्व की सर्वाधिक रोचक तथा महत्त्वपूर्ण सभ्यताओं में से एक है। इस सभ्यता के समुचित ज्ञान के लिए हमें इसकी शिक्षा पद्धति का अध्ययन करना आवश्यक है, जिसने इस सभ्यता को चार हजार वषों से भी अधिक समय तक सुरक्षित रखा। प्राचीन भारतीयों ने शिक्षा को अत्यधिक महत्व प्रदान किया। भौतिक तथा … Read more

भक्ति आन्दोलन और सांस्कृतिक समन्वय

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        प्राचीन भारतीय हिन्दू दर्शन के अनुसार मोक्ष प्राप्त करना ही अथवा जीवन-मरण के बन्धन से छुटकारा प्राप्त करना ही जीवन का अन्तिम लक्ष्य है। मोक्ष प्राप्ति के तीन मार्ग बतलाये गये हैं- ज्ञान, कर्म और भक्ति। सल्तनत काल (1206-1526 ई.) में कई हिन्दू सन्तों और सुधारकों ने हिन्दू धर्म के लिए एक आन्दोलन प्रारम्भ … Read more

गुप्तकालीन कला और साहित्य

गुप्तकालीन कला और साहित्य कला और साहित्य की दृष्टि से गुप्तकाल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण-युग कहा जाता है। गुप्तकाल में ही मंदिर निर्माण कला का जन्म हुआ। ये मंदिर नागर शैली के हैं। गुप्तकालीन मन्दिर         गुप्तकालीन मंदिरों का प्रारम्भ गर्भगृह के साथ हुआ जिसमें देवमूर्ति की स्थापना की जाती थी। यहाँ तक पहुँचने … Read more

प्रेम रंग में दीवानी मीरा ~ करुणा व प्रेम का प्रतीक लोकदेवता बाबा रामदेव ~ रामसा पीर, रुणेचा रा धणी, पीरां रा पीर श्रीकृष्ण को सर्वोत्तम मित्र क्यों माना जाता है ? परमाणु क्या होता है ? आप जानते हो ! झाँसी की रानी के रहस्मयी तथ्य सुनीता विलियम्स ~ भारतीय मूल की अन्तरिक्ष यात्री पारिवारिक सम्बंध में हमारे रिश्तों की पहचान क्या होती है ? क्या आप पदार्थ (Matter) के बारे में जानते है ?🤔 सरदार भगतसिंह क्यों बने क्रन्तिकारी ? भूमण्डलीय स्थितीय तंत्र (GPS – Global Positioning System ) International Pushkar Fair